हिंदी

अंतर्राष्ट्रीय भाषाएं भारत में

Share

[English]


भारत सरकार ने २२ भाषाओं को सरकारी माना है. लेकिन इसके अलावा भी हमारे देश में और बहुत सारी भाषाएँ है, जो सैकड़ों लोग बात करते है. भारत की आज़ादी के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल के सुझाव को मानकर हमारे प्रांत बनाए गए थे भाषाओं के आधार पर. भारत सरकार ने हिंदी और अंग्रेज़ी, दोनो को सरकारी माना है. और इस लिए एक मामूली हिंदुस्तानी को कम से कम तीन भाषों का ज्ञान होता है, हिंदी, अंग्रेजी और उस प्रांत की भाषा. अलग-अलग शिक्षालयों में अलग-अलग भाषा माध्यम उपयोगी है. और यह भाषा माध्यम तय करता है कि कौन सी भाषा को अधिक महत्व देना चाहिए.

अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं की भारत में प्रसद्धी बढ़ती जा रही है. इन में से फ्रेंच सबसे प्रचलित है. Alliance Francaise के पंदरह शाखाएं, पूरभारत में फैले हुए हैं. फ्रेंच के बाद सबसे प्रचलित स्पैनिश है. यह भाषापूरी दुनिया में ३०० करोड़ लोग त करते हैं और इस भाषा का ज्ञा होना काफी फायदे मंद हो सकता है. इस के बाद चीनी भाषा की प्रसिदिधी भी कुछ कम नहीं है. आज कल फ्रेंच पाठशालाओं में भी सिखाया जाता है.कुछ विश्वविद्यालय भी है जो फ्रेंच में डिग्री दिलवाते हैं.

अंतर्राष्ट्रीय भाषा की डिग्री या डिप्लोमा होने से साधारण रूप में अनुवादक के तौर पर या टूरिज़्म के व्यापार में ढेर सारा पैसा कमाने का अवसर होता है. मीडिया की दुनिया में और और अंतर्राष्ट्रीय कोंस्युलेटों में भी अच्छी पदवी मिलने का अवसर होता है. इस से विदेश घुमने का मौका भी मिलता है. अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं का महत्व इस तरह से हमारे देश में बढ़ता जा रहा है.

You might also like:

Comments Closed