हम तो ऐसे ही हैं!

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[English]


हमे कहा गया कि इस हफ़्ते का विषय है – अंग्रेज़ी शब्द आपकी भाषा में कैसे आ गये हैं, और उनमें कौनसे बदल हो चुके हैं। अब यह सब अंग्रेज़ी में लिखना अलग और हिंदी में लिखना बिलकुल अलग बात है।

दो सौ बरस भारत अंग्रेज़ों के राज्य में रहा। अब यह ध्यान में रखा जाए तो आश्चर्य की बात नहीं है कि भारत में अंग्रेज़ी की हर तरफ फैलाव दिखाई देती है। लेकिन क्या यह सच में अंग्रेज़ी है भी?

जैसे अमिताभ बच्चनजी ने कहा था – आय कॅन टॉक इन इंग्लिश, आय कॅन वॉक इन इंग्लिश, आय कॅन लाफ़ इन इंग्लिश; बिकॉज़ इंग्लिश इज़ अ फन्नी लॅन्गवेज। यानि कि, मैं अंग्रेज़ी बोल सकते हूँ, मैं अंग्रेज़ी चाल सकते हूँ और मैं अंग्रेज़ी हंस सकता हूँ – क्योंकि अंग्रेज़ी बहुत अजीब सी भाषा है।

अंग्रेज़ी सच में अजीब भाषा है। और अब उसका हिंदी में मिश्रण होनो के बाद तो और भी अद्भुत भाषा पैदा हो गई, जिसे हम अब नाम देते हैं हिंग्लिश। सबसे मज़ेदार बात है कि हम हमेशा ऐसे शब्द का उपयोग करते है जो सुनने में अंग्रेज़ी लगते हैं, दिखने में अंग्रेज़ी लगते हैं, लेकिन सच में अंग्रेज़ी नहीं हैं! अगर आप भारत में ज़रा भी घूम चुके है, ज़रूर आपने देखे होंगे हमारे बड़े बड़े ट्रक जो सामान पहुंचाने के लिए काम आते हैं। इन ट्रक पर हमेशा पीछे तीन शब्द अंग्रेज़ी में लिखे हुए दिखाई देते हैं – Horn OK Please. लेकिन इसका मतलब क्या है? मुझे आज तक पता नही! मैं जितने भी लोगों से पूछूं, किसी को भी पता नहीं।

भारत की प्रतिज्ञा में लिखा गया है – सब भारतीय मेरे भाई-बहन हैं। हम इस प्रतिज्ञा को बहुत मानते हैं। इसी लिए तो, रास्ते में हर कोई मिलने वाला आदमी हमारा “अंकल” है, और हर औरत हमारी “आंटी”। हम परिवार का मतलब जानते हैं। तभी तो पूरा भारत हमारा परिवार हैं।

शहरों में तो बात अलग ही हैं। यहां भाषाओं की कोई कदर नहीं, बस अगर दो लोग एक दूसरे को समझ पोते हैं, तो काफ़ी है। जब कॉलेज में दो विद्यार्थी एक दूसरे के साथ बात कर रहे है, पहचानने में मुश्किल हे जाता है कि यह भाषा कौनसी है। लेकिन पहचानने के कोशिश ही मत कीजिए – यह कोई एक भाषा नहीं। ज्यादातर विद्यार्थीयों की भाषा मतलब हिंदी, अंग्रेज़ी और एक तीसरी भाषा का अनोखा मिश्रण हो ता है।

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