हिंदी

समध्वनी शब्द

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हिंदी में हम अधिकतर जैसा बोलते हैं वैसे ही लिखते हैं. कभी कभी जब उच्चारण में अंतर हो, या कोई गलती हो जाए तब ही हम हिंदी में समध्वनिक शब्दों का निर्माण होता है. इस लिए हिंदी में समध्वनिक शब्द विरल है. इसका मतलब यह नहीं की ऐसे शब्द हिंदी में है ही नहीं. मैं जो उदाहरण यहाँ प्रस्तुत करने वाली हूँ, ये लिखने में थोडे से अलग है, लेकिन अगर इन्के उच्चारण में थोडी सी भी गलती हो ते मुसीबत हो सकती है.

जैसे की ‘बांस‘ और ‘बास‘. एक छोटी सी बिंदु, देखिए, कितना बड़ा अंतर बना सकता है. इसी तरह, ‘गदा‘ और ‘गधा‘ ये भी काफी मिलते जुलते हैं. अगर ‘द‘ और ‘ध‘ में अंतर न करें तो दोनो ही एक जैसे सुनाई देंगे.

अंतर्राष्ट्रीय महमान जब हिंदी सीखतें हैं, तो उन्हे इन शब्दों से बडी परेशानी होती है, जैसे ‘और‘ , ‘ओर‘.‘प्रवाह‘ और ‘पर्वाह‘ की भी कुछ ऐसी ही कानी है. वे व्यक्ति जो उच्च हिंदी के प्रेमी हैं, उन्हे पता होगा, की ‘चतुर‘,‘चतुर्‘ में क्या अंतर है. लेकिन औरों के लिए ये देने एक ही शब्द हैं.
शब्द लिखने में गलती करें तो भी मुसीबत होती है. जैसे, ‘प्रमाण‘ और ‘प्रणाम‘,‘परिणाम‘ और ‘परिमाण‘. लेकिन सबसे मज़ेदार गलतिया इन शब्दों के बीच होती है – ‘आचार‘ और ‘अचार‘.

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