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उफ! क्या शब्द हैं!

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दुनिया के अधिकतर भाषाओं की तरह हिंदी में भी शब्द जो विस्मयादिबोधक होते हैं, वे या तो माँ या फिर भगवान के लिए बुलावा होता है. सबस प्रचलित, जो हर हिंदुस्तानी के दिल को संताप से भर देता है वह है – हे राम! यह हमारे प्रिय महात्मा गांधी के अंतिम शब्द थे. योद्धाओं के सरताज, सीतापति और विष्णु भगवान के अवतार राम जी भगवान हर स्थिती में अपनी उपस्थिति सिद्ध करते हैं. चाहे वह कोई परेशान माँ हो, कोई अप्रसन्न नानी हो, दुःखित पिता या चिंतित युवा हो. इन्ही संदर्भों में उपयुक्त और वाक्यांश है, हाय राम और राम राम. चूँकि राम एक हिंदू देवता है, मुसलमानों में इसका तुल्य होगा हाय अल्लाह, या फिर अल्लाह.

हम जब कष्ट में होते है तो अपनी माँ को पुकारते हैं. ओह माँ, उई माँ ये कुछ शब्द हैं जो हमारे होठों पर अकसर आ गिरते हैं. ओह माँ पुरुषों के लिए होता है, जब कि उई माँ स्त्रियों के लिए होता है. जब निराश, उदास या थका हुआ हो तो वह कहता है, ´हाय´. गहरी साँस लेकर एक लंबा हाय गले से निकलते ही दिल का दर्द कम हो जाता है. जब को खूबसूरत बला आपके सामने से गुज़रे और आपके दिल अचानक से धड़कने लगे तब भी ´हाय´ का इस्तेमाल किया जा सकता है. ´धत्! ऐसी बातें लिखते हुए जीब लगता है, जो मज़ा या सुकून इन शब्दों को कहने में है, वह लिखने में नहीं.´ अगर कोई गलती हुई हो या किसी को कुछ कहने के लिए डाँटना चाहो तो कहते है धत्.

विस्मयादिबोधक शब्दों के कुछ और उदाहरण है, अरे, ओय, ओह, ओहो, उफ, वाह. ये सारे चिढ, प्रशंसा, या किसी दोस्त को बुले के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं.

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